शनिवार, 29 अगस्त 2026

बालाघाट का 500 करोड़ी डबल मनी घोटाला, मास्टरमाइंड सोमेंद्र कंकराने 7 साथियों संग हरिद्वार से गिरफ्तार, तीन साल से था फरार

 

बालाघाट के बहुचर्चित डबल मनी घोटाले में मास्टरमाइंड सोमेंद्र कंकराने को 7 साथियों संग हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया गया है। 500 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का ये मामला है। पुलिस मामले में तेजी से कार्रवाई कर रही है।

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले का सबसे चर्चित और बड़ा 'डबल मनी घोटाला' एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस ने इस पूरे सुनियोजित सट्टे और धोखाधड़ी के खेल के मुख्य सूत्रधार सोमेंद्र कंकराने को उसके सात अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह पूरी कार्रवाई उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार से की गई है, जहां ये सभी आरोपी पिछले तीन साल से अपनी पहचान छिपाकर फरारी काट रहे थे। मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकराने अदालत से भी फरार घोषित था और उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी हो चुका था। निवेशकों की गाढ़ी कमाई हड़पने वाले इस शातिर गिरोह के खिलाफ अनियमित जमा प्रतिबंध कानून के तहत 63 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक यह पूरा घोटाला 500 करोड़ रुपये से भी अधिक का है, जिसके कारण पुलिस और प्रशासन पर आरोपियों को दबोचने का भारी दबाव था।

साल 2022 में हुआ था भंडाफोड़, जमानत रद्द होते ही भागे

बालाघाट में इस फर्जी निवेश योजना का पर्दाफाश साल 2022 में हुआ था। उस दौरान पुलिस ने सख्त कदम उठाते हुए सोमेंद्र कंकराने समेत कई लोगों को हिरासत में लिया था। शुरुआती छापेमारी में पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से 13 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद की थी। इसके साथ ही, जांच को आगे बढ़ाते हुए करीब 32 बैंक खातों में जमा 11 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया गया था और आरोपियों की लगभग 45 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्तियों को कुर्क करने की बड़ी कार्रवाई की गई थी। पहली गिरफ्तारी के बाद सोमेंद्र को अदालत से सशर्त जमानत मिल गई थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में माननीय उच्च न्यायालय ने उसकी बेल को खारिज कर दिया था। जमानत रद्द होने और ट्रायल कोर्ट में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण निवेशकों के मामलों की कानूनी सुनवाई पूरी तरह ठप पड़ी थी, क्योंकि आरोपी अपने वकीलों के जरिए सिर्फ तारीखें आगे बढ़वा रहा था।

कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच और सफेदपोशों का संरक्षण

इस डबल मनी स्कीम का शिकार सिर्फ बालाघाट ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के लोग भी हुए थे। आम नागरिकों से लेकर सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों, बड़े व्यापारियों और राजनेताओं ने भी कम समय में अमीर बनने के चक्कर में करोड़ों रुपये का निवेश कर दिया था। सोमेंद्र कंकराने ने शुरुआत में साख बनाने के लिए 8 से 9 महीने में पैसा दोगुना करके लौटाया, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ गया। बाद में जब बाजार में कुछ और प्रतिद्वंद्वी आ गए और उन्होंने 2 से 3 महीने में ही पैसा डबल करने का दावा ठोक दिया, तो सोमेंद्र के धंधे में गिरावट आने लगी। इसके बाद उसने एजेंटों का एक नेटवर्क तैयार किया और निवेशकों को गारंटी के तौर पर ब्लैंक चेक देने शुरू कर दिए। जब पैसे वापस मिलने बंद हुए और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों की बाढ़ आई, तब जाकर पुलिस ने इस रैकेट को ध्वस्त किया। तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष सुश्री हिना कावरे ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। चर्चा है कि इस मुख्य आरोपी को बचाने और उसकी पैरवी करने में कई रसूखदार और सफेदपोश लोग भी पर्दे के पीछे से शामिल थे, जिनकी शह पर वह फरार होने में कामयाब रहा था।

मास्टरमाइंड के साथ परिवार और मददगार भी आए शिकंजे में

पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन में टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए न सिर्फ सोमेंद्र को पकड़ा, बल्कि उसके साथ फरारी काट रहे पूरे कुनबे और मददगारों को दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में सोमेंद्र के परिजन और साथी शामिल हैं, जिनके नाम राकेश महेश्वरे, तामेश महेश्वरे, प्रदुम्मन कंकराने, दिनेश कंकराने, रामप्रसाद मनसुरे, प्रदीप कंकराने और रूपचंद घरडे हैं। इन सभी के खिलाफ अवैध रूप से वित्तीय योजनाएं चलाने के गंभीर आरोप हैं। पुलिस के अनुसार इस घोटाले से जुड़े दो अन्य प्रमुख आरोपी अजय तिडके और हेमराज आमाडारे पहले से ही जेल की सलाखों के पीछे हैं। सोमेंद्र की गिरफ्तारी के बाद अब न्यायालय में लंबित पड़े मुकदमों की सुनवाई में तेजी आएगी और पीड़ितों को जल्द न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

रिपोर्ट - शौकत बिसाने

साभार-इंडिया टीवी

 


ब्लैक विडो घोटाला: रूसी सैनिकों से फर्जी शादी कर मौत का मुआवजा हड़पने का खेल

 

यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस में एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आ रहा है. कुछ महिलाओं पर आरोप है कि वे रूसी सेना में भर्ती होने वाले पुरुषों से जल्दबाजी में शादी कर लेती हैं. फिर जब वे सैनिक मोर्चे पर मारे जाते हैं तो उनकी मौत का सरकारी मुआवजा अपने नाम कर लेती हैं.

 

रूसी अधिकारी और मीडिया इन्हें ब्लैक विडो कहकर पुकार रहे हैं. यह घोटाला न सिर्फ सैनिकों के परिवारों को सदमे में डाल रहा है बल्कि समाज में गुस्से का माहौल भी पैदा कर रहा है. 

 

सेंट पीटर्सबर्ग में रहने वाली 37 वर्षीय मारिया का अनुभव इस घोटाले की तस्वीर साफ करता है. सैन्य अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनके 59 वर्षीय पिता यूरी मोर्चे पर गोली लगने से घायल हुए. बाद में मौत हो गई. मारिया को न तो पता था कि उनके पिता सेना में भर्ती हुए हैं. न ही यह कि उन्होंने सिर्फ दो दिन पहले शादी कर ली थी. 

दुल्हन उनके पिता से 22 साल छोटी थी. कानूनी रूप से अगली उत्तराधिकारी बन गई. मारिया कहती हैं कि मैं अब भी सदमे में हूं. पहले लगा जैसे सपना देख रही हूं. आज भी कभी-कभी लगता है कि यह सब सपना ही था, लेकिन यह सच है. उन्होंने उस महिला से कभी बात नहीं की और तुरंत शक किया कि यह घोटाला है. सीएनएन ने उस विधवा से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन जवाब नहीं मिला.

 

जब कोई रूसी सैनिक युद्ध में मारा जाता है तो उसके निकटतम परिजन को सैन्य मुआवजा मिलता है जो पांच लाख रूबल यानी करीब 64 हजार डॉलर से शुरू होता है. यह रकमभर्ती होने वाले सैनिकों को आश्वासन देने के लिए दी जाती है कि अगर सबसे बुरा हुआ तो उनके परिवार का ख्याल रखा जाएगा. लेकिन अब चिंता बढ़ रही है कि इस  सुविधा का दुरुपयोग हो रहा है.

 

हाल के महीनों में रूस में कई ऐसी कहानियां चर्चा में आईं जिनमें भर्ती होने वाले सैनिकों को शादी के जाल में फंसाया गया. कुछ मामलों में तो घायल सैनिकों से अस्पताल में मौत से पहले शादी कर ली गई. एक बड़े मामले में एक नर्स पर आरोप लगा कि उसने अपने देखभाल में आए पांच सैनिकों से शादी की ताकि उनकी मौत के मुआवजा ले सके. बाद में उसे नौकरी से निकाल दिया गया.

 

यह घोटाला रूसी समाज में गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है. युद्ध को क्रेमलिन अब भी विशेष सैन्य अभियान कहता है लेकिन घरेलू मोर्चे पर इसकी कीमत साफ दिख रही है. अर्थव्यवस्था खराब हो रही है. ईंधन की कमी है. यूक्रेनी हमले रूसी धरती पर हो रहे हैं . ऐसे में ब्लैक विडो के खिलाफ आवाजें तेज हो रही हैं.

 

रूसी संसद के प्रभावशाली सांसद लियोनिद स्लुत्स्की ने कहा कि विशेष सैन्य अभियान में भाग लेने वाले परिवारों को बेशर्म अपराधियों, तथाकथित ब्लैक विडो, वित्तीय और टेलीफोन घोटालेबाजों से सुरक्षा की जरूरत है. उन्होंने कहा कि ऐसे अपराध अब गंभीर हो रहे हैं. इनकी संख्या भी बढ़ रही है.

 

सरकार की शादी को बढ़ावा देने वाली नीति

 

2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने के आक्रमण के बाद क्रेमलिन ने भर्ती होने वाले सैनिकों को शादी करने के लिए प्रोत्साहित किया. शायद परिवार का सहारा बढ़ाने या लड़ने की अतिरिक्त प्रेरणा देने के लिए. यह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाली नीति के भी अनुरूप था क्योंकि रूस में जनसंख्या घट रही है. 

अधिकारियों ने नए सैनिकों के लिए त्वरित शादी की व्यवस्था की जिसमें सामान्य नोटिस अवधि को हटा दिया गया. राज्य टेलीविजन पर स्थानीय अधिकारियों द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम दिखाए गए. एक सैनिक से शादी करना, खासकर जो जल्द मोर्चे पर भेजा जाने वाला हो, संपत्ति खरीदने का रास्ता भी बन गया.

टॉम्स्क शहर में रियल एस्टेट एजेंट ने एक पॉडकास्ट में चौंकाने वाली सलाह दी. जब होस्ट ने पूछा कि 30 साल की महिला अपार्टमेंट कैसे खरीदे तो एजेंट मरीना ओरलोवा ने हंसते हुए कहा कि एक ऐसा पुरुष ढूंढो जो विशेष सैन्य अभियान में सेवा दे रहा हो. जब वह मारा जाएगा तो तुम्हें आठ लाख रूबल यानी करीब एक लाख दो हजार डॉलर मिल जाएंगे. कई महिलाएं आजकल सस्ते अपार्टमेंट ऐसे ही खरीद रही हैं. यह बिजनेस है. दोनों महिलाओं पर मुकदमा चला, उन्हें लंबी सामुदायिक सेवा की सजा मिली और सैनिकों तथा उनकी पत्नियों से माफी मांगनी पड़ी.

 

कुछ मामलों में अदालतों ने भी हस्तक्षेप किया. रियाज़ान के एक सैनिक जॉर्जी कोस्त्यर्को ने छुट्टी के दौरान एंजेलीना वर्युखिना से मुलाकात की और दस दिन बाद शादी कर ली. मां के अनुसार नई पत्नी जल्द ही दूसरे पुरुषों के साथ तस्वीरें डालने लगीं. बेटा तलाक के लिए आवेदन करने ही वाला था कि मारा गया. पत्नी को मुआवजा मिला. बाद में अदालत ने उसकी उत्तराधिकारी स्थिति रद्द कर दी लेकिन घोटाले ने व्यापक गुस्सा पैदा किया. कुछ मामलों में रूसी सुरक्षा बलों के सदस्य भी शामिल बताए गए. सुदूर पूर्व के प्रिमोर्स्की क्राय में वारंट ऑफिसर, सार्जेंट और सैन्य लेखाकार पर आरोप लगा कि उन्होंने अनाथ और बिना नजदीकी रिश्तेदार वाले कमजोर पुरुषों को भर्ती किया, उनकी शादी करवाई और फिर उन्हें खतरनाक मोर्चे पर भेज दिया जहां मरने की संभावना ज्यादा थी. मुआवजे में हिस्सा लेने का इरादा बताया गया. इस मामले में अभी सार्वजनिक अपडेट नहीं आए हैं.

 

साभार-आज तक

मुंबई पुलिस में ₹6.41 करोड़ का सैलरी घोटाला, कागजों पर थे 10 'घोस्ट कर्मचारी'; 6 साल बाद खुला राज

मुंबई पुलिस विभाग के पेरोल रिकॉर्ड में 6.41 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। यहां उन 10 पुलिस कर्मचारियों के नाम पर सैलरी के तौर पर करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए, जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं था।

2019 और 2020 के बीच मुंबई पुलिस के 'कर्मचारियों' को सैलरी के तौर पर लगभग 6.4 करोड़ रुपये दिए गए। इस मामले में अब छह साल बाद पता चला कि ये कर्मचारी सिर्फ कागजों पर ही मौजूद थे।

कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?

पुलिस कर्मचारियों का डेटा पुराने सैलरी पोर्टल 'सेवार्थ' से जब नए सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर किया जा रहा था, तब ऐसे 10 नाम सामने आए, जिनके नाम पर सैलरी दी गई, लेकिन ये कर्मचारी सिर्फ कागजों पर ही मौजूद थे।

उत्तरी क्षेत्रीय डिवीजन के एक पुलिस अधिकारी की शिकायत के मुताबिक, दस ऐसे लोगों को बार-बार कर्मचारी के तौर पर लिस्ट किया गया जो पुलिसकर्मी नहीं थे और उनके बैंक खातों में हर महीने सैलरी जाती रही।

इन फर्जी पुलिसकर्मियों के बैंक खाते में ट्रांजैक्शन दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 तक और जून 2020 से सितंबर 2020 के बीच किए गए।

FIR में बताए गए 10 फर्जी नाम ये हैं- रामदास भोगले, सुधाकर कदम, सरजू यादव, भागवत भोसले, गुनाजी खावकर, महादेव हलदानकर, राजेंद्र सोनार, उत्तम थोराट, सूर्यकांत पाटिल और पांडुरंग कदम।

पुलिस के अनुसार, मिनिस्ट्रियल लेवल के क्लर्कों ने मिलीभगत करके अटेंडेंस रजिस्टर और फर्जी कर्मचारियों (घोस्ट एम्प्लॉई) के रिकॉर्ड बनाए। इन पर बाहरी लोगों के नाम पेरोल में जोड़ने का आरोप लगा है।

फर्जी ट्रांजैक्शन करने के मामले में केस दर्ज

घटना के समय पद पर रहे पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। FIR में नामजद कर्मचारियों में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रामकृष्ण गोस्वामी, नागेश तलवडेकर और विजया चव्हाण के साथ-साथ हेड क्लर्क अजय राठौड़ और सीनियर क्लर्क अमोल मेश्राम शामिल हैं।

इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।

मुंबई पुलिस विभाग ने बिना मंजूरी के सैलरी प्रोसेस करने के लिए फर्जी सर्विस ID और डिफाइंड कंट्रीब्यूशन पेंशन स्कीम (DCPS) ID बनाने के आरोपों के बाद विजया चव्हाण और क्लर्क अमोल मेश्राम को सस्पेंड कर दिया है।

सस्पेंड किए गए कर्मचारियों को प्राइवेट नौकरी या व्यापार करने की भी इजाजत नहीं है। गुजारे के लिए भत्ता पाने के लिए उन्हें रेगुलर तौर पर जानकारी देनी होगी और बिना आधिकारिक मंजूरी के बृहन्मुंबई इलाके से बाहर जाने पर भी रोक लगा दी गई है।

इस मामले में अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी खोले गए बैंक अकाउंट्स को कौन कंट्रोल करता था।

साभार- जागरण