मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

नीरा राडिया के 800 टेप


हिंदुस्तान की राजनीति में इनदिनों यदि सबसे अधिक कोई महिला चर्चित है तो वह है नीरा राडिया। नीरा राडिया के संबंध देश के ताकतवार राजनेताओं, मंत्रियों और मीडिया के दिग्गजों तक से हैं। वे इस संबंध का इस्तेमाल अपने क्लाइंट्स को फायदा पहुंचाने के लिए करती हैं। नीरा की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके कॉल की एक घंटी मंत्रियों को सीट से उठा देने के लिए काफी है। उसके कॉल तय करते थे कि किस घराने को कौन सा ठेका मिलेगा। कॉरपोरेट्स धराने, मीडिया और राजनेता के इस खतरनाक गठजोड़ ने पूरे देश को चौंका दिया है। आखिर नीरा है क्या बला? जब दैनिक भास्कर डॉट कॉम ने इसी पड़ताल की तो उसकी जिंदगी के कई राज सामने आए।
धुंधराले बालों वाली नीरा मूलत: ब्रिटिश नागरिक हैं। लेकिन अपनी बिजनेसमेन पति जनक राडिया से तलाक के बाद उन्होंने लंदन से भारत का रुख किया। भारत में उनके तीन बेटे उनके साथ रहती हैं। 2003 में उनके बिजनेस पार्टनर धीरज सिंह को उनके 18 साल के बेटे के अपहरण के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।
नीरा का नाम दुनिया के सामने पहली बार 2008-09 में आया जब आयकर विभाग ने उनके कुछ फोन कॉल को टैप किया। इस फोन कॉल से पता चला कि कैसे नीरा अपने क्लाइंट को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार में दखल करती हैं।
नीरा राडिया चार कंपनियों की मालकिन है। वे जिस-जिस कंपनी की मालिक हैं, उनके टेलीफोन टेप किए गए थे। आयकर निदेशालय के मुताबिक टेलीफोन टैप से जो बाते सामने आईं हैं उसमें अपने कॉरपोरेट क्लाइंट की व्यवसायिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार के कई विभाग के निर्णयों को बदला गया और कई मामलों में तो नीतिगत फैसलों को भी बदलवाकर लाभ पहुंचाया गया। नीरा ने पूर्व दूरसंचार ए.राजा से कई ऐसे फैसले बदलवा दिए जिससे उसके क्लाइंट का लाभ पहुंच सके।
टैप से साबित हुआ है कि राडिया की पहुंच सीधी ए राजा तक है। वह सीधे राजा को ही कॉल करती थी। बीच में कभी भी कोई सचिव या पीए नहीं होता था। कुछेक दस्तावेज तो यह भी बताते हैं कि नीरा के संबंध झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से भी थे। नीरा ने अपने क्लाइंट को खान दिलाने के लिए उन्हें 180 करोड़ रूपए की रिश्वत दी थी। सीबीआई की कागजों में कहा गया है कि झारखंड में लौहअयस्क की खानों के बदले नीरा ने कोड़ा और दो सहयोगियों को भारी पैसा दिया था।
नीरा का संबंध सिर्फ राजनीतिक गलियारों में ही नहीं बल्कि मीडिया में भी रहा। नीरा ने कई प्रभावशाली मीडिया हस्तियों से संपर्क साधती थीं और अपने लिए प्रयोग करती थीं। देश के दो बड़े पत्रकार इस सिर्फ शक के घेरे में हैं। एक देश की ख्यात महिला पत्रकार हैं जो एक न्यूज चैनल में काम करती हैं तो दूसरे पत्रकार एक अंग्रेजी अखबार में हैं। हालांकि, दोनों ने नीरा से किसी भी प्रकार के ऐसे संबंध से इंकार किया है जिसका फायदा वह उनसे उठाती थीं।
नीरा को शिकंजे में लेना कोई आसान काम नहीं है। उसकी कंपनियां टाटा ग्रुप के साथ-साथ यूनिटेक, मुकेश अंबानी की रिलांयस से लेकर देश के कई ख्यात मीडिया संस्थानों के लिए भी काम करती हैं। {साभार दैनिक भास्कर}


नीरा राडिया के 800 टेप और

सरकार को नीरा राडिया पर कर चोरी और विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिए जासूसी करने का शक है
एक ओर सरकार ने कहा है कि वह नीरा राडिया की विभिन्न लोगों से हुई बातचीत के 140 टेपों को वापस हासिल नहीं कर सकती क्योंकि पूरी सामग्री कई जगह प्रकाशित हो चुकी है और इंटरनेट पर घूम रही है.
दूसरी ओर बातचीत के विवरण प्रकाशित कर चुकी पत्रिका 'आउटलुक' ने कहा है कि उसे नीरा राडिया की बातचीत के 800 नए टेप मिले हैं.
पत्रिका का कहना है कि इन नए टेप से नीरा राडिया के कामकाज के तरीक़ों पर नई जानकारी मिलती है.
इन 800 टेपों के बारे में जानकारी ऐसे समय में मिल रही है जब सरकार ने नीरा राडिया की बातचीत के सारे टेप एक सील बंद लिफ़ाफ़े में सुप्रीम कोर्ट में जमा करवा दिए हैं.
नीरा राडिया देश के दो बड़े उद्योगपतियों रतन टाटा और मुकेश अंबानी की कंपनियों के लिए जनसंपर्क का काम करती रही हैं लेकिन टेप आने के बाद कहा जा रहा है कि वे दरअसल इन कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट दलाल का काम करती थीं.अभी 'आउटलुक'के रिपोर्टर इन टेपों के दर्ज बातचीत के विवरण जुटाने में लगे हुए हैं लेकिन ये स्पष्ट रुप से वर्ष 2009 में मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल के गठन और 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले में सरकार, बड़े व्यावसायिक घरानों और मीडिया के बीच के खेल की एक डरावनी तस्वीर पेश करते हैं
आउटलुक
अब तक जो 140 टेप सार्वजनिक हुए हैं उससे पता चलता है कि वे अपनी ग्राहक कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए पत्रकारों से लेकर राजनेताओं का किस तरह इस्तेमाल करती रही हैं.
सरकार का कहना है कि नीरा राडिया की विभिन्न लोगों से बातचीत को आयकर विभाग के निर्देश पर टेप किया गया था.
इस बातचीत के सार्वजनिक होने के बाद से राजनीतिक गलियारों, उद्योग-व्यवसाय जगत और पत्रकारों के बीच विवाद छिड़ गया है.

नए टेप

'आउटलुक' पत्रिका ने अपनी वेबसाइट पर प्रमुखता से प्रकाशित एक ख़बर में कहा है कि उसे नीरा राडिया की बातचीत के 800 नए टेप मिले हैं.
पत्रिका ने कहा है, "ये टेप भी अधिकृत रुप से रिकॉर्ड की गई बातचीत का हिस्सा है और उन 140 टेपों के अतिरिक्त है, जो पहले ही सार्वजनिक हो चुके हैं."
 
नीरा राडिया की बातचीत से ज़ाहिर होता है कि वे राजा को दूरसंचार मंत्री बनाए रखने की कोशिशों में लगी हुई थीं
पत्रिका के संपादक कृष्णा प्रसाद ने बीबीसी से हुई बातचीत में इसकी पुष्टि की है और कहा है कि वे इनमें से चार टेपों के विवरण वेबसाइट पर प्रकाशित कर चुके हैं और शेष के विवरण भी प्रकाशित किए जाएंगे.
उसने अपनी ख़बर में लिखा है, "अभी 'आउटलुक'के रिपोर्टर इन टेपों के दर्ज बातचीत के विवरण जुटाने में लगे हुए हैं लेकिन ये स्पष्ट रुप से वर्ष 2009 में मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल के गठन और 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले में सरकार, बड़े व्यावसायिक घरानों और मीडिया के बीच के खेल की एक डरावनी तस्वीर पेश करते हैं."
इस ख़बर में कहा गया है कि इस बातचीत के केंद्र में ए राजा को यूपीए-2 में दूरसंचार मंत्री बनाए रखना ही है.
आउटलुक ने नए टेपों के जो संक्षिप्त विवरण पेश किए हैं उसके अनुसार नीरा राडिया की बातचीत से ज़ाहिर होता है कि ए राजा को दूरसंचार मंत्री बनाने के लिए किस तरह की बातचीत चल रही थी और इसे लेकर करुणानिधि के परिवार में किस तरह की खींचतान चल रही थी.

सरकार का दावा

इससे पहले सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दायर करके कह दिया कि वह इससे पहले सार्वजनिक हो चुके नीरा राडिया की बातचीत वाले टेप को वापस नहीं ले सकती.कुछ टेपों के विवरण प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित हो चुके हैं और ये इंटरनेट पर घूम रहे हैं ऐसे में इन टेपों को वापस हासिल करना न तो संभव है और न ही व्यावहारिकसरकार का हलफ़नामा सरकार ने यह बात उस नोटिस के जवाब में कही है जो सुप्रीम कोर्ट ने रतन टाटा की ओर से दायर एक याचिका पर जारी की थी.रतन टाटा ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह सरकार को इन टेपों के विवरण का प्रकाशन रुकवाए.
अपने आठ पेज के हलफ़नामे में सरकार ने कहा है, "कुछ टेपों के विवरण प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित हो चुके हैं और ये इंटरनेट पर घूम रहे हैं ऐसे में इन टेपों को वापस हासिल करना न तो संभव है और न ही व्यावहारिक."
सरकार ने कहा है कि नीरा राडिया की बातचीत आयकर महानिदेशालय के निर्देश पर टेप की गई थी. उसके अनुसार ऐसा वित्तमंत्रालय को मिली एक शिकायत के बाद किया गया था जिसमें नीरा राडिया पर सिर्फ़ नौ साल में 300 करोड़ की कंपनी खड़ी करने के आरोप लगाए गए थे.
सरकार का यह भी आरोप है कि नीरा राडिया विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसियों की एजेंट हैं और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त रही हैं.
अपने हलफ़नामे में सरकार ने कहा है, "जिस तरह से इस बातचीत को टेप किया गया उसमें गोपनीयता और सुरक्षा को ध्यान में रखा गया और इलेक्ट्रॉनिक डेटा को भी हिफ़ाज़त से रखा गया."
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सरकार ने अपना यह दावा बरक़रार रखा है कि उसने जो बातचीत रिकॉर्ड की है वह आयकर विभाग ने लीक नहीं की है. हालांकि सरकार ने कहा है कि नीरा राडिया और दूसरे लोगों की बातचीत के टेप लीक होने की जाँच की जा रही है.{साभार बीबीसी हिंदी}

मंत्रिपद के लिए खूब चलती रही 'डीलिंग'कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया और वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी की यह बातचीत 22 मई 2009 की है। इस बातचीत से पता चलता है कि सरकारों में मंत्रिपद किस तरह बांटे जाते हैं। बातचीत के मुख्य अंश:

वीर सांघवी- आपको पता है, मारन ने सोनिया से मुलाकात नहीं की है।
नीरा राडिया- हां नहीं मिले हैं। वे सबको नहीं बता रहे।
सांघवी- वो सोनिया से नहीं मिलेंगे। वे लोग उसे ऑफिशियल प्रवक्ता के रूप में भी नहीं मान रहे हैं। वो गुलाम नबी आजाद को हर आधे घंटे में फोन कर रहे हैं और नई डिमांड रख रहे हैं।
नीरा- हां।
सांघवी- दो बीवियां, एक बेटा, एक बहन, एक भांजा... ये सब हम लोगों के लिए बड़ा मुश्किल हो गया है। हमने एक बेसिक ऑफर दिया है। अगर करुणानिधि जवाब देते हैं और कहते हैं कि वो सीधी बात करना चाहते हैं... तो वो मिसेज गांधी से बात करना चाहेंगे। उन्होंने सिर्फ मनमोहन सिंह से बात की है। हमें खुशी होगी लेकिन हम अब और उनके पीछे नहीं भागेंगे। हमने मारन से भी कह दिया है कि उन्हें हमारे पास आना होगा और बताना होगा कि हमारे ऑफर के बारे में वो क्या सोचते हैं।
नीरा- हां।
सांघवी- तो हम दो दिन इंतजार करेंगे। उन्हें वापस आने दीजिए। हमारी लाइन है कि यह समस्या कांग्रेस और डीएमके के बीच नहीं है। प्रॉब्लम डीएमके के अंदर है क्योंकि वे लोग उनकी बीवियों और बच्चों और भांजों के बीच तालमेल नहीं बना पा रहे हैं। उनको (करुणा) एक आदमी का नाम देना होगा और फिर हम उससे बात करेंगे। हमलोग इस मारन से खुश नहीं हैं जो बार-बार गुलाम नबी को फोन करके कह रहे हैं कि मुझसे बात करो, मुझसे बात करो। वे लोग उसे गंभीरतापूर्वक नहीं ले रहे हैं।
नीरा- बड़ा रोचक है। मैं खुश हूं। आपने गुलाम नबी से बात की है?
सांघवी- मैंने अहमद से बात की है। गुलाम नबी महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हैं। अहमद हैं।
नीरा- सही, सही।
सांघवी : हां, अहमद ने कहा है कि गुलाम मारन के साथ डिलिंंग कर रहे हैं। लेकिन गुलाम अपना आदमी नहीं है और हमलोग मारन की बात को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने पांच प्रमुख मंत्रालयों की बात कही है जो बेतुका और गैरवाजिब मांग है। हमलोगों ने वाजिब मांग तैयार की है। अब यह करुणानिधि के ऊपर है कि वे हमारी बात मानें। कणि और दूसरे लोग भी आएं और देखें कि किस तरह की मांग तैयार की गई है। दरवाजा सबके लिए खुला हुआ है। लेकिन हमलोग ऐसी स्थिति में कुछ नहीं कर सकते हैं जिसमें मारन कॉल करके कहते हैं कि मैं यह चाहता हूं तो मैं यह चाहता हूं। कौन है ये मारन?
नीरा : हां।
सांघवी : क्या मारन आज ही वापस चेन्नई चले गये हैं?
नीरा : हां, वे चेन्नई चले गये हैं। मैं उन्हें वापस आने के लिए कहूंगी।
सांघवी : उन्होंने कहा कि हमने बात की है। तब हमने मारन से कहा कि करुणानिधि के साथ डील कर लिया जायेगा। मारन तो आश्वस्त होकर कह रहे थे कि हमलोगों ने बहुत ही उचित मांग तैयार की है और करुणानिधि के ऊपर हमलोगों की गहरी श्रद्धा है जिससे हमलोग उनके साथ डील कर लेंगे। लेकिन हमलोगों को मारन के प्रति कोई श्रद्धा नहीं है।
नीरा : ओके। मामला रोचक है।
सांघवी : हां।
नीरा : बेहतर होगा मैं उनसे यह कहूं।
सांघवी : हां, अब आगे देखें क्या होता है। मेरा मतलब है कि मुझे कुछ जानकारी चाहिए। उसके बाद कुछ कहूंगा।
नीरा : ओके। सही है...
{साभार दैनिक भास्कर}

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें