शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

425 करोड़ के घोटाले के सुबूत ले गई सीबीआई

 

425 करोड़ के खाद्यान्न घोटाले की जांच करने आई सीबीआई टीम ने दो दिनों तक बैंक खातों की पड़ताल के साथ कोटेदारों के बयान दर्ज किए हैं। सीबीआई टीम ने बुधवार को इटियाथोक के कोटेदारों से पूछताछ की। साथ ही दो दर्जन से अधिक राशन कार्डों की पड़ताल की है। जिला पूर्ति अधिकारी से घोटाले से जुड़े अभिलेख भी तलब किए हैं। पड़ताल के बाद घोटाले के सुबूत हासिल कर सीबीआई टीम लखनऊ रवाना हो गई।


खाद्यान्न घोटाले में सीबीआई टीम ने मंडी और कोटेदारों के बैंक खातों की जानकारी भी हासिल की है। जिससे यह पता चल सके कि घोटाले का खेल कैसे हुआ। दरअसल खाद्यान्न का उठान के लिए कोटेदारों को अपने खातों से बैंकर्स चेक देना होता था, अक्सर एक ही व्यक्ति कई कोटेदारों का बैंकर्स चेक गोदाम पर जमाकर उठान करते थे। यहीं से घोटाले का खेल शुरू हुआ था।


जिले में वर्ष 2004 से 2006 के बीच खाद्यान्न घोटाला हुआ था। शासन की जांच में 425 करोड़ के खाद्यान्न घोटाले की रिपोर्ट सामने आई थी। ईओडब्लू ने जांच की तो संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना तक ही सीमित रही। उस समय रोजगार योजना में श्रमिकों को काम के बदले अनाज भी मिलता था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर 2007 में सीबीआई ने जांच शुरू की।

17 थानों में दर्ज हुए थे 63 मुकदमें
मामले में 63 मुकदमे 17 थानों में दर्ज हुए थे। मामले में 300 से अधिक लोग अभी तक आरोपित किए जा चुके हैं। बुधवार को भी जिला आपूर्ति कार्यालय में सीबीआई टीम पहुंची। वहां पर टीम के अधिकारियों ने इटियाथोक के लोगों के बयान दर्ज किए।

सीबीआई की टीम ने मध्यनगर के तत्कालीन कोटेदार राणा प्रताप सिंह व बेलभरिया गांव के प्रेम प्रकाश गुप्ता के बयान दर्ज किए। राशन कार्ड के साथ कोटेदारों के अभिलेखों की पड़ताल की है। सीबीआई को कुछ और अभिलेख की जरूरत है। जिसकी सूची जिला पूर्ति अधिकारी को दी है, उनसे अभिलेख मांगे गए हैं।
आपूर्ति विभाग सीबीआई मुख्यालय को अभिलेख उपलब्ध कराएगा। टीम अभी फिर जिले में आएगी। माना जा रहा है कि सीबीआई घोटाले की जड़ तक जाने की कोशिश कर रही है और खाद्यान्न माफिया के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में हैं।

बिना काम कराए ही हुआ था फर्जी भुगतान
खाद्यान्न घोटाले की शुरुआती जांच में 63 मामले ऐसे सामने आए थे, जिसमें बिना काम कराए ही फर्जी भुगतान किए गए और अनाज का वितरण दिखाया गया। थानों में मुकदमे दर्ज हुए और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष समेत कई ब्लॉक प्रमुख और बीडीओ के विरुद्ध मुकदमे दर्ज हुए।
गिरफ्तारियां हुईं और फिर जांच सीबीआई को मिली। सीबीआई ने जांच शुरू की तो पता चला कि इसके अलावा उन वर्षों में गरीबों को कोटे के माध्यम से दिए जाने के राशन में भी घोटाले की बात सामने आई। सीबीआई राशन वितरण में गड़बड़ी की भी जांच कर रही है।

 

स्रोत - अमर उजाला

 

शनिवार, 15 अक्टूबर 2022

एक और बड़े घोटाले के विवाद में घिरी केजरीवाल सरकार, CBI ने मामला दर्ज कर शुरू की जांच

 

दिल्ली सरकार एक बार फिर से विवादों में घिर गई है। दिल्ली सरकार के वन और वन्‍य जीव (फारेस्ट और वाइल्ड लाइफ) विभाग में 223 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है। इस मामले में CBI ने जांच शुरु कर दी है। सीबीआई ने वन और वन्यजीव यानी फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ विभाग , दिल्ली सरकार द्वारा बैंक ऑफ बड़ौदा में सावधि जमा के रूप में 223 करोड़ के निवेश में कथित जालसाजी और धोखाधड़ी की जांच के लिए मामला दर्ज किया है। CBI ने बैंक ऑफ बड़ौदा के बैंक के सीनियर ब्रांच मैनेजर एलए खान समेत फारेस्ट और वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट दिल्ली सरकार के अज्ञात अफसर और बैंक ऑफ बड़ोदा के अज्ञात अफसरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 409, 420, 467, 468, 471 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13(2) 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया है।

फर्जी अकाउंट में ट्रांस्फर होता था पैसा

खुफिया सूत्रों से CBI को पता लगा कि दिल्ली सरकार के फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ विभाग की तरफ से बैंक ऑफ बड़ौदा की पहाड़गंज ब्रांच को 223 करोड़ रुपए का सरप्लस फंड रिज मैनेजमेंट बोर्ड फंड के नाम से एफडीआर्स में इन्वेस्ट करने के नाम पर जारी किया। बैंक के सीनियर ब्रांच मैनेजर एल ए खान ने 223 करोड़ रुपए बैंक ऑफ बड़ौदा पहाड़गंज की ब्रांच में एकांउन्ट नंबर 00980100028204 दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड DUSIB के नाम पर ट्रांसफर किया जो कि एक फर्जी एकांउन्ट था। जानकारी को वैरिफाई किया गया तो पता चला कि दिल्ली सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ ने फिक्स डिपॉजिट स्किम जिसे रिज मैनेजमेंट बोर्ड फंड के नाम से 223 करोड़ रुपए का फंड एप्रूव किया और एक साल बाद बैंक ऑफ बड़ौदा पहाड़गंज ब्रांच से SBI आईपी एक्सटेंशन में ट्रांसफर कर लिया गया। 

बैंक के अज्ञात अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज

जांच में पता चला कि बैंक ऑफ बड़ौदा के सीनियर बैंक मैनेजर एल ए खान ने डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ के अज्ञात अफसरों के साथ मिलकर गलत तरीके से फर्जी लेटर्स के सहारे 223 करोड़ रुपए sundry एकांउन्ट बैंक ऑफ बड़ौदा से सेविंग एकांउन्ट में ट्रांसफर किए और दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड का एकांउन्ट भी फर्जी पाया गया। साथ ही बैंक मैनेजर एल ए खान ने रिज मैनेजमेंट बोर्ड के नाम से फर्जी FDR स्कीम के लैटर फारेस्ट और वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट को जारी कर दिए। जांच के बाद सीबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा पहाड़गंज ब्रांच के सीनियर ब्रांच मैनेजर एल ए खान, डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ और बैंक ऑफ बडौदा बैंक के अज्ञात अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


स्रोत - इंडिया टीवी