रविवार, 5 दिसंबर 2021

2100 करोड़ की वैट चोरी घोटाले को उजागर करने वाले अधिकारी को PM नरेंद्र मोदी ने दी जन्मदिन की बधाई

 

पीएम नरेंद्र मोदी ने ई-मेल से आबकारी अधिकारी को ग्रिटिंग कार्ड भेजा है. पीएम ने लिखा- प्रिय जीडी ठाकुर आपको जन्मदिन की शुभकामनाएं, यह वर्ष आपके जीवन में और अधिक खुशियां और सफलता लेकर आए. आबकारी एवं कराधान विभाग में कार्यरत अधिकारी जीडी ठाकुर देश में सबसे बड़े टैक्स चोरी में से एक केस समेत कई घोटालों का पर्दाफाश कर चुके हैं. जीडी ठाकुर चंबा जिले की डलहौजी तहसील के डूका गांव के रहने वाले हैं.

हिमाचल प्रदेश के आबकारी एवं कराधान विभाग (Excise and Taxation Department) में कार्यरत अधिकारी जीडी ठाकुर (GD Thakur) का 50वां जन्मदिन बेहद खास रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने जीडी ठाकुर को जन्मदिन की बधाई दी है. ठाकुर उत्कृष्ट कार्यों के लिए जाने जाते हैं. देश में सबसे बड़े वैट चोरी के मामले (VAT evasion Case) समेत कई घोटालों का पर्दाफाश कर चुके जीडी ठाकुर इस समय सोलन जिले के परवाणु में आबकारी एवं कराधान विभाग के साउथ जोन में ज्वाइन कमिश्नर के पद पर तैनात हैं और जीएसटी का कार्य देख रहे हैं.

जीडी ठाकुर चंबा जिले की डलहौजी तहसील के डूका गांव के रहने वाले हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ई-मेल के जरिए जीडी ठाकुर को बधाई दी और ग्रिटिंग कार्ड भेजा है. पीएम ने ग्रिटिंग कार्ड में लिखा है,”प्रिय जीडी ठाकुर, आपको जन्मदिन की बधाई, यह वर्ष आपके जीवन में और अधिक खुशियां और सफलता लेकर आए.” पीएम का ये ई-मेल जीडी ठाकुर को उनकी पर्सनल ई-मेल आईडी पर बुधवार सुबह 11 बजकर 21 मिनट पर आया. जीडी ठाकुर ने शुभकामनाओं के लिए पीएम का आभार जताया है.

 

2100 करोड़ रुपये का वैट चोरी घोटाला किया था उजागर

बता दें कि हिमाचल में इंडियन टैक्नोमैक कंपनी द्वारा किए गए 2100 करोड़ रू. के वैट चोरी के घोटाले का पर्दाफाश जीडी ठाकुर ने किया था, जैसे जैसे जांच आगे बढ़ी तो ये घोटाला 6 हजार करोड़ को पार कर चुका है. बैट चोरी का ये देश का सबसे बड़ा मामला था, इसके अलावा भी कई घोटालों का पर्दाफाश कर चुके हैं. इंडियन टैक्नोमैक कंपनी मामले पर इन्होंने सीआईडी में एफआईआर करवाई, मामले की जांच ईडी और सीबीआई भी कर रही है, इस जांच में जुटे कुछ अधिकारियों को राष्ट्रपति मैडल समेत कई अवॉर्ड मिले हैं.

12 साल प्राइवेट जॉब करने के बाद आए सरकारी सर्विस में 

1 दिसंबर 1971 को जन्मे जीडी ठाकुर ने पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और 12 साल प्राइवेट सेक्टर में नौकरी की. जीडी ठाकुर ने हैदराबाद स्थित नालसर यूविवर्सिटी ऑफ लॉ से साइबर क्राइम में पीजी डिप्लोमा किया है. प्रारंभिक पढ़ाई डलहौजी तहसील के तहत सरकारी स्कूल नैनीखड में हुई. साल 2002 में शिमला में आबकारी एवं कराधान विभाग के इंस्पेक्टर के रूप में सरकारी सेवा में आए. 2003 में लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर ईटीओ बने.

स्रोत - न्यूज़ 18 

 

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2021

210 करोड़ के नलकूप बिल घोटाले से जुड़े अहम साक्ष्य गायब

 

जिले में 210 करोड़ के नलकूप बिल घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज गायब हैं। एमडी कार्यालय से हापुड़ कार्यालय पहुंची टीम को जांच में तीन वर्षों का पूरा रिकॉर्ड ही नहीं मिला है, सिर्फ 22 लेजर ही टीम को मिले हैं। इससे जांच की गुत्थी फिर उलझ गई है, दो दशक से चल रही जांच में अभी भी निगम के हाथ खाली हैं, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
वर्ष 2002 से 2004 तक निगम में नलकूप किसानों का बिजली बिल मैनुअल जमा किया जाता था। तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारियों ने इसका लाभ उठाकर किसानों से रुपये ले लिए लेकिन बिल राजस्व कोष में जमा नहीं किया, जो रसीदें काटी गई उन्हें जला दिया गया। मामले का खुलासा हुआ तो लिपिक समेत कई कर्मचारियों को जेल हुई, अधिकारियों के तबादले हुए, एफआईआर भी दर्ज हुई। इस घोटाले की जांच ईडी समेत कई जांच एजेंसियां कर चुकी हैं। लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला है।

 

एमडी कार्यालय से अब मामले की जांच कराई जा रही है, वहां की टीम ने दो दिन तक हापुड़ में रिकॉर्ड खंगाला। लेकिन मुख्य दस्तावेज गायब मिले, बिलों को संशोधित करने या घोटाले की परत खोलने की दृष्टि से गायब हुआ रिकॉर्ड अहम माना जा रहा है। टीम को जो 22 लेजर मिले हैं उनसे जांच में कितना सहयोग मिलेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।

1500 से अधिक किसानों को भेज रहे गलत बिल
नलकूप बिलों में करोड़ों के घपलेबाजी से किसानों के बिलों में लाखों रुपये की गलत बकायेदारी जुड़कर आ रही है। पूरा बिल जमा करने के बावजूद किसानों को इससे निजात नहीं मिल रही है। घपले के शिकार हुए किसानों के बिलों की बकायेदारी चक्रवर्ती ब्याज के साथ लगातार बढ़ रही है, पूरा बिल जमा होने के बावजूद उनके बिल पांच लाख से अधिक रुपये के बनाए जा रहे हैं।

तत्कालीन डीएम के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई थी जांच
नलकूप बिल घोटाले की जांच वर्ष 2003 से ही चल रही है, लेकिन अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ है। तत्कालीन डीएम अदिति सिंह ने वर्ष 2019 में शासन को पत्र भेजकर, मामले से अवगत कराया। जिस पर एमडी कार्यालय से टीम गठित हुई। यह टीम करीब सात बार हापुड़ में रिकॉर्ड खंगाल चुकी है।
जांच का चल रहा अंतिम चरण
अफसरों का कहना है कि जांच का अंतिम चरण है, किसानों से उनके बिल की मूल कॉपी भी जमा कराई जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कब तक इस घपले का निर्णय होगा। दोषियों से वसूली होगी या नहीं, किसानों के बिल खत्म होंगे या नहीं।
ऑनलाइन जमा नहीं कर सकते बिल
घोटाले के शिकार किसान ऑनलाइन बिल जमा नहीं कर सकते हैं। उनके बिलों का अभी भी मैनुअल ही जोड़ा जाता है। इसी के अनुसार उन्हें ओटीएस का लाभ मिलता है, जबकि पुराने सरचार्ज माफी पर कोई रियायत नहीं मिलती।
इन मामलों में हुई विद्युत निगम की किरकिरी
* गढ़ डिवीजन में फर्जी रसीदों से 60 लाख का घोटाला, मामले में एफआईआर दर्ज हुई।
* उबारपुर बिजलीघर के अवर अभियंता ने पैसे लेकर हाईटेंशन लाइन शिफ्ट की, लाखों का खेल, जेई का सिर्फ तबादला हुआ।
* हापुड़ में मीटर से छेड़छाड़ कर गलत वसूली के मामले में तत्कालीन एसई, एक्सईएन, एसडीओ, जेई के तबादले।
* मीटर में लाखों की रीडिंग स्टोर के मामले में एफआईआर।
* दो बिजलीघरों को जोड़ने वाली लाइन गलत तरीके से शिफ्ट, जांच जारी।
* पिलखुवा में रिश्वत लेने पर जेई निलंबित।
बिल जमा, फिर भी लाखों के बकायेदार
नलकूप का बिल लगातार जमा कर रहे हैं, लेकिन निगम में हुए घोटाले के बाद से उनके बिलों में लाखों की बकायेदारी जुड़कर आ रही है। सालों से बिलों को सही कराने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन राहत नहीं मिल रही है।--दया रामपाल, कुचेसर चौपला।--फोटो संख्या--32
ऑॅनलाइन जमा नहीं होता बिल
बिलों में गड़बड़ी के चलते ऑनलाइन बिल जमा नहीं कर पाते हैं। बिल ठीक कराने के लिए पहले दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते हैं और फिर लाइन में लगकर बिल जमा कराना पड़ता है। गलती अधिकारियों ने की है और भुगतनी किसानों को पड़ रही है। - संतुशरण त्यागी

घोटाले की चल रही जांच
नलकूप बिल घपले की जांच एमडी कार्यालय से चल रही है। किसानों के बिलों का रिकॉर्ड भेजा जा रहा है। जल्द ही किसानों को इस तरह के बिलों से निजात मिल जाएगी।--यूके सिंह, अधीक्षण अभियंता।

स्रोत - अमर उजाला