425 करोड़ के खाद्यान्न घोटाले की जांच करने आई
सीबीआई टीम ने दो दिनों तक बैंक खातों की पड़ताल के साथ कोटेदारों के बयान दर्ज
किए हैं। सीबीआई टीम ने बुधवार को इटियाथोक के कोटेदारों से पूछताछ की। साथ ही दो
दर्जन से अधिक राशन कार्डों की पड़ताल की है। जिला पूर्ति अधिकारी से घोटाले से
जुड़े अभिलेख भी तलब किए हैं। पड़ताल के बाद घोटाले के सुबूत हासिल कर सीबीआई टीम
लखनऊ रवाना हो गई।
खाद्यान्न घोटाले में सीबीआई टीम ने मंडी और कोटेदारों के बैंक खातों
की जानकारी भी हासिल की है। जिससे यह पता चल सके कि घोटाले का खेल कैसे हुआ। दरअसल
खाद्यान्न का उठान के लिए कोटेदारों को अपने खातों से बैंकर्स चेक देना होता था,
अक्सर एक ही व्यक्ति कई कोटेदारों का बैंकर्स चेक गोदाम पर जमाकर उठान
करते थे। यहीं से घोटाले का खेल शुरू हुआ था।
जिले में वर्ष 2004 से 2006
के बीच खाद्यान्न घोटाला हुआ था। शासन की जांच में 425 करोड़
के खाद्यान्न घोटाले की रिपोर्ट सामने आई थी। ईओडब्लू ने जांच की तो संपूर्ण
ग्रामीण रोजगार योजना तक ही सीमित रही। उस समय रोजगार योजना में श्रमिकों को काम
के बदले अनाज भी मिलता था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर 2007 में
सीबीआई ने जांच शुरू की।
17 थानों में दर्ज हुए थे 63 मुकदमें
मामले में 63 मुकदमे 17
थानों में दर्ज हुए थे। मामले में 300 से
अधिक लोग अभी तक आरोपित किए जा चुके हैं। बुधवार को भी जिला आपूर्ति कार्यालय में
सीबीआई टीम पहुंची। वहां पर टीम के अधिकारियों ने इटियाथोक के लोगों के बयान दर्ज
किए।
सीबीआई की टीम ने मध्यनगर के तत्कालीन कोटेदार
राणा प्रताप सिंह व बेलभरिया गांव के प्रेम प्रकाश गुप्ता के बयान दर्ज किए। राशन
कार्ड के साथ कोटेदारों के अभिलेखों की पड़ताल की है। सीबीआई को कुछ और अभिलेख की
जरूरत है। जिसकी सूची जिला पूर्ति अधिकारी को दी है, उनसे
अभिलेख मांगे गए हैं।
आपूर्ति विभाग सीबीआई मुख्यालय को अभिलेख उपलब्ध कराएगा। टीम अभी फिर
जिले में आएगी। माना जा रहा है कि सीबीआई घोटाले की जड़ तक जाने की कोशिश कर रही
है और खाद्यान्न माफिया के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में हैं।
बिना काम कराए ही हुआ था फर्जी भुगतान
खाद्यान्न घोटाले की शुरुआती जांच में 63 मामले
ऐसे सामने आए थे, जिसमें बिना काम कराए ही फर्जी भुगतान किए गए और
अनाज का वितरण दिखाया गया। थानों में मुकदमे दर्ज हुए और पूर्व जिला पंचायत
अध्यक्ष समेत कई ब्लॉक प्रमुख और बीडीओ के विरुद्ध मुकदमे दर्ज हुए।
गिरफ्तारियां हुईं और फिर जांच सीबीआई को मिली। सीबीआई ने जांच शुरू
की तो पता चला कि इसके अलावा उन वर्षों में गरीबों को कोटे के माध्यम से दिए जाने
के राशन में भी घोटाले की बात सामने आई। सीबीआई राशन वितरण में गड़बड़ी की भी जांच
कर रही है।
स्रोत - अमर उजाला