मंगलवार, 26 मई 2015

चंबल तक आई 'व्यापमं घोटाला संषर्ष समिति' की आंच

 

व्यापमं घोटाले के जिन्न् से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरने की कोशिश सिर्फ कांग्रेस नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वं सेवक संघ से मुक्त प्रचारक और असंतुष्ट भी कर रहे हैंं। विरोध के लिए 'व्यापमं घोटाला संघर्ष समिति' बनाई है। इस समिति की आंच चंबल (भिंड) तक आ चुकी है।

सितंबर 2014 में पूर्व प्रचारक मनीष काले और अभय जैन ने भिंड में बैठक की है। यह बात अब इसलिए सामने आई चूंकि हाल में घोषित भाजपा कार्यकारिणी में उन नेताओं को स्थान दिए जाने की बात आ रही है, जो बैठक में शामिल हुए थे। भाजपा का असंतुष्ट खेमा इस मामले को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार चौहान तक पहुंचाने की तैयारी में है।

शहर के लॉज में हुई थी बैठक

व्यापमं घोटाले को लेकर चलाए जा रहे अभियान से जोड़ने के लिए पूर्व प्रचारक मनीष काले और अभय जैन ने सितंबर माह में भिंड के एक लॉज में बैठक की थी। भाजपा सूत्रों का कहना है इस बैठक में भाजपा और संघ से जुड़े आधा दर्जन से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। अब इन नेताओं को भाजपा की जिला कार्यकारिणी में बड़े पद से लेकर कार्यसमिति सदस्य तक की जिम्मेदारी देने की बात कही जा रही है। हकीकत का खुलासा आला नेतृत्व से शिकायत और उसकी जांच के बाद होगा।

संघर्ष समिति ने अब तक यह किया

व्यापमं घोटाला संघर्ष समिति ने भिंड सहित प्रदेश के कई जिलों में बैठकें की हैं। भोपाल में 15 सितंबर को सत्याग्रह किया। पूर्व प्रचारक मनीष काले कहते हैं वे भोपाल में सत्याग्रह कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन उन्हें गिरफ्तार करा लिया गया। तब उन्होंने 172 साथियों के साथ 1-2 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित ज्ञापन दिया, जिसमें इस पूरे घोटाले में जांच और कार्रवाई की मांग की गई।

जन जागरण के लिए अभियान

- व्यापमं घोटाले के खिलाफ जन जागरण अभियान में प्रदेश के 23 जिलों में 1 लाख से ज्यादा पत्रक बांटे गए, जिनमें व्यापमं घोटाले से जुड़ी जानकारियां हैं।

- घोटाले के विरोध के लिए समर्थन जुटाने 23 जिलों में 25 हजार लोगों के बीच हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया।

- व्यापमं घोटाले की जिम्मेदारी तय करने के लिए मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड भेजे गए, जिसमें पूछा गया घोटाले का जिम्मेदार कौन है?

- ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए फेसबुक पर व्यापमं घोटाला संघर्ष समिति नाम से पेज बनाया गया है, जिसे 394 लोगों ने लाइक किया है।

इनका कहना है

व्यापमं घोटाले के विरोध में भिंड में भी बैठक की थी। भोपाल में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने गए थे। हमें गिरफ्तार करा लिया गया। हमारे पास विकल्प नहीं था तब हमें दिल्ली जाना पड़ा। दिल्ली में 172 साथियों के साथ जंतर मंतर पर धरना देकर राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। हमारा अभियान अभी बंद नहीं है।

मनीष काले, पूर्व प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ

विरोध अभी बंद नहीं

व्यापमं घोटाले के विरोध में भिंड में भी बैठक की थी और भी जगह की हैं। हम अभियान की आगे की रणनीति नहीं बता सकते। व्यापमं घोटाले का विरोध अभी बंद नहीं है।

अभय जैन, पूर्व प्रचारक, राष्ट्रीय स्वं सेवक संघ

कोई असंतुष्‍ट नहीं

व्यापमं घोटाले को लेकर संघर्ष समिति की बैठक में कौन शामिल हुआ इसके बारे में मुझे कुछ नहीं पता है। भाजपा में कोई असंतुष्ट नहीं है। लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है।

संजीव कांकर, जिलाध्यक्ष, भाजपा भिंड

 

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

व्यापमं घोटाले में मप्र के राज्यपाल पर एफआइआर

 

मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले में एसटीएफ ने मंगलवार को राज्यपाल रामनरेश यादव सहित सात लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली। राज्यपाल पर तीन उम्मीदवारों को वनरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जी तरीके से पास कराने का आरोप है। सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। हाई कोर्ट ने राज्यपाल सहित अतिविशिष्ट लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। एसटीएफ के डीएसपी डीएस बघेल ने एफआइआर दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। बघेल के मुताबिक वनरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 में गड़बडिय़ां करने वाले 87 अभ्यर्थियों सहित कुल 101 आरोपी बनाए गए हैं।

 

गिरफ्तारी के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी

संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ चालान पेश करने के लिए एसटीएफ को केंद्र सरकार के मार्फत राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी पड़ेगी। इस मुकादमे को दर्ज करने के बाद एफटीएफ सिर्फ राज्यपाल से पूछताछ कर अपनी विवेचना को आगे बढ़ा सकेगी। राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने का उन्हें तकनीकी रूप से फायदा मिलेगा। पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अजय मिश्रा का मानना है कि वैधानिक रूप से राज्यपाल तब तक पद पर बने रह सकते हैं जब तक कि उनके खिलाफ राष्ट्रपति अभियोजन की मंजूरी नहीं दे देते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिन धाराओं में मामला दर्ज है वे सभी गैर-जमानती हैं, पर गिरफ्तारी के लिए भी राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी पड़ेगी।

 

इस्तीफा या बर्खास्तगी में से होगा फैसला

सूत्रों का दावा है कि केंद्रीय गृह सचिव ने राजभवन के प्रमुख सचिव विनोद सेमवाल को फोन कर प्रदेश के राजनीतिक हालात, संवैधानिक स्थितियां और राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ दर्ज हुए आपराधिक मुकदमे का ब्योरा लिया। केंद्रीय गृह सचिव ने प्रमुख सचिव को यह भी समझाइश दी है कि वे राज्यपाल को इस्तीफा देने संबंधी केंद्र सरकार की सलाह दे दें। उधर, सूत्रों का यह भी कहना है कि नैतिकता के नाते पद ने छोडऩे पर केंद्र सरकार राज्यपाल को बर्खास्त तक कर सकती है।

 

दिग्विजय ने दिए कई मोबाइल नंबर

भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह के दो पत्र के साथ मंगलवार को व्यापमं मामले की मूल एक्सलशीट पेनड्राइव में एसआइटी को सौंप दी गई। एक पत्र में कुछ मोबाइल नंबर देते हुए सर्विस प्रोवाइडर से कॉल डिटेल निकलवाकर जांच कराने की मांग की गई है। सिंह ने पत्र में दावा किया है कि इन नंबरों की पड़ताल से व्यापमं घोटाले में कई लोगों की संलिप्तता उजागर होगी। पत्र में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और उनसे जुड़े लोगों पर निशाना साधा गया है।

स्रोत – जागरण