शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

व्यापमं घोटाले में मप्र के राज्यपाल पर एफआइआर

 

मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले में एसटीएफ ने मंगलवार को राज्यपाल रामनरेश यादव सहित सात लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली। राज्यपाल पर तीन उम्मीदवारों को वनरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जी तरीके से पास कराने का आरोप है। सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। हाई कोर्ट ने राज्यपाल सहित अतिविशिष्ट लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। एसटीएफ के डीएसपी डीएस बघेल ने एफआइआर दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। बघेल के मुताबिक वनरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 में गड़बडिय़ां करने वाले 87 अभ्यर्थियों सहित कुल 101 आरोपी बनाए गए हैं।

 

गिरफ्तारी के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी

संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ चालान पेश करने के लिए एसटीएफ को केंद्र सरकार के मार्फत राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी पड़ेगी। इस मुकादमे को दर्ज करने के बाद एफटीएफ सिर्फ राज्यपाल से पूछताछ कर अपनी विवेचना को आगे बढ़ा सकेगी। राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने का उन्हें तकनीकी रूप से फायदा मिलेगा। पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अजय मिश्रा का मानना है कि वैधानिक रूप से राज्यपाल तब तक पद पर बने रह सकते हैं जब तक कि उनके खिलाफ राष्ट्रपति अभियोजन की मंजूरी नहीं दे देते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिन धाराओं में मामला दर्ज है वे सभी गैर-जमानती हैं, पर गिरफ्तारी के लिए भी राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी पड़ेगी।

 

इस्तीफा या बर्खास्तगी में से होगा फैसला

सूत्रों का दावा है कि केंद्रीय गृह सचिव ने राजभवन के प्रमुख सचिव विनोद सेमवाल को फोन कर प्रदेश के राजनीतिक हालात, संवैधानिक स्थितियां और राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ दर्ज हुए आपराधिक मुकदमे का ब्योरा लिया। केंद्रीय गृह सचिव ने प्रमुख सचिव को यह भी समझाइश दी है कि वे राज्यपाल को इस्तीफा देने संबंधी केंद्र सरकार की सलाह दे दें। उधर, सूत्रों का यह भी कहना है कि नैतिकता के नाते पद ने छोडऩे पर केंद्र सरकार राज्यपाल को बर्खास्त तक कर सकती है।

 

दिग्विजय ने दिए कई मोबाइल नंबर

भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह के दो पत्र के साथ मंगलवार को व्यापमं मामले की मूल एक्सलशीट पेनड्राइव में एसआइटी को सौंप दी गई। एक पत्र में कुछ मोबाइल नंबर देते हुए सर्विस प्रोवाइडर से कॉल डिटेल निकलवाकर जांच कराने की मांग की गई है। सिंह ने पत्र में दावा किया है कि इन नंबरों की पड़ताल से व्यापमं घोटाले में कई लोगों की संलिप्तता उजागर होगी। पत्र में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और उनसे जुड़े लोगों पर निशाना साधा गया है।

स्रोत – जागरण