जिले में 210 करोड़ के नलकूप बिल
घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज गायब हैं। एमडी कार्यालय से हापुड़ कार्यालय पहुंची
टीम को जांच में तीन वर्षों का पूरा रिकॉर्ड ही नहीं मिला है, सिर्फ 22 लेजर ही टीम को मिले हैं। इससे जांच की
गुत्थी फिर उलझ गई है, दो दशक से चल रही जांच में अभी भी
निगम के हाथ खाली हैं, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़
रहा है।
वर्ष 2002 से 2004 तक निगम में
नलकूप किसानों का बिजली बिल मैनुअल जमा किया जाता था। तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारियों ने इसका लाभ उठाकर किसानों से रुपये ले लिए लेकिन बिल राजस्व
कोष में जमा नहीं किया, जो रसीदें काटी गई उन्हें जला दिया
गया। मामले का खुलासा हुआ तो लिपिक समेत कई कर्मचारियों को जेल हुई, अधिकारियों के तबादले हुए, एफआईआर भी दर्ज हुई। इस
घोटाले की जांच ईडी समेत कई जांच एजेंसियां कर चुकी हैं। लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं
निकला है।
एमडी कार्यालय से अब मामले की जांच कराई जा रही है, वहां की टीम ने दो दिन तक हापुड़ में रिकॉर्ड खंगाला। लेकिन मुख्य
दस्तावेज गायब मिले, बिलों को संशोधित करने या घोटाले की परत
खोलने की दृष्टि से गायब हुआ रिकॉर्ड अहम माना जा रहा है। टीम को जो 22 लेजर मिले हैं उनसे जांच में कितना सहयोग मिलेगा, यह
आने वाला समय ही बताएगा।
1500 से अधिक किसानों को भेज रहे गलत बिल
नलकूप बिलों में करोड़ों के घपलेबाजी से किसानों के बिलों में लाखों
रुपये की गलत बकायेदारी जुड़कर आ रही है। पूरा बिल जमा करने के बावजूद किसानों को
इससे निजात नहीं मिल रही है। घपले के शिकार हुए किसानों के बिलों की बकायेदारी
चक्रवर्ती ब्याज के साथ लगातार बढ़ रही है, पूरा बिल जमा
होने के बावजूद उनके बिल पांच लाख से अधिक रुपये के बनाए जा रहे हैं।
तत्कालीन डीएम के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई थी जांच
नलकूप बिल घोटाले की जांच वर्ष 2003 से ही चल
रही है, लेकिन अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ है। तत्कालीन डीएम
अदिति सिंह ने वर्ष 2019 में शासन को पत्र भेजकर, मामले से अवगत कराया। जिस पर एमडी कार्यालय से टीम गठित हुई। यह टीम करीब
सात बार हापुड़ में रिकॉर्ड खंगाल चुकी है।
जांच का चल रहा अंतिम चरण
अफसरों का कहना है कि जांच का अंतिम चरण है, किसानों
से उनके बिल की मूल कॉपी भी जमा कराई जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कब तक
इस घपले का निर्णय होगा। दोषियों से वसूली होगी या नहीं, किसानों
के बिल खत्म होंगे या नहीं।
ऑनलाइन जमा नहीं कर सकते बिल
घोटाले के शिकार किसान ऑनलाइन बिल जमा नहीं कर सकते हैं। उनके बिलों
का अभी भी मैनुअल ही जोड़ा जाता है। इसी के अनुसार उन्हें ओटीएस का लाभ मिलता है,
जबकि पुराने सरचार्ज माफी पर कोई रियायत नहीं मिलती।
इन मामलों में हुई विद्युत निगम की किरकिरी
* गढ़ डिवीजन में फर्जी रसीदों से 60 लाख का
घोटाला, मामले में एफआईआर दर्ज हुई।
* उबारपुर बिजलीघर के अवर अभियंता ने पैसे लेकर हाईटेंशन लाइन शिफ्ट
की, लाखों का खेल, जेई का सिर्फ तबादला
हुआ।
* हापुड़ में मीटर से छेड़छाड़ कर गलत वसूली के मामले में तत्कालीन
एसई, एक्सईएन, एसडीओ, जेई के तबादले।
* मीटर में लाखों की रीडिंग स्टोर के मामले में एफआईआर।
* दो बिजलीघरों को जोड़ने वाली लाइन गलत तरीके से शिफ्ट, जांच जारी।
* पिलखुवा में रिश्वत लेने पर जेई निलंबित।
बिल जमा, फिर भी लाखों के बकायेदार
नलकूप का बिल लगातार जमा कर रहे हैं, लेकिन
निगम में हुए घोटाले के बाद से उनके बिलों में लाखों की बकायेदारी जुड़कर आ रही
है। सालों से बिलों को सही कराने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन राहत नहीं मिल
रही है।--दया रामपाल, कुचेसर चौपला।--फोटो संख्या--32
ऑॅनलाइन जमा नहीं होता बिल
बिलों में गड़बड़ी के चलते ऑनलाइन बिल जमा नहीं कर पाते हैं। बिल
ठीक कराने के लिए पहले दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते हैं और फिर लाइन में लगकर बिल
जमा कराना पड़ता है। गलती अधिकारियों ने की है और भुगतनी किसानों को पड़ रही है। -
संतुशरण त्यागी
घोटाले की चल रही जांच
नलकूप बिल घपले की जांच एमडी कार्यालय से चल रही है। किसानों के
बिलों का रिकॉर्ड भेजा जा रहा है। जल्द ही किसानों को इस तरह के बिलों से निजात
मिल जाएगी।--यूके सिंह, अधीक्षण अभियंता।
स्रोत - अमर उजाला
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